ऑक्सफोर्ड में दिव्या मदेरणा: "भारत में महिलाएं, शक्ति और सार्वजनिक जीवन" पर बेबाक चर्चा

ऑक्सफोर्ड में दिव्या मदेरणा: "भारत में महिलाएं, शक्ति और सार्वजनिक जीवन" पर बेबाक चर्चा

A Candid Discussion on

A Candid Discussion on "Women, Power, and Public Life in India"

लंदन/जयपुर। राजस्थान की राजनीति में अपनी बेबाक पहचान रखने वाली पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव दिव्या मदेरणा ने दुनिया के प्रतिष्ठित संस्थान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट' (Blavatnik School of Government) में भारत का प्रतिनिधित्व किया। "भारत में महिलाएं, शक्ति और सार्वजनिक जीवन" विषय पर आयोजित इस विशेष सत्र में दिव्या ने भारतीय राजनीति में महिलाओं के संघर्ष, सफलता और भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से चर्चा की।

लोकतंत्र के लिए महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य

सत्र को संबोधित करते हुए दिव्या मदेरणा ने पुरजोर तरीके से कहा कि राजनीति में महिलाओं की मौजूदगी महज 'संख्या' बढ़ाने का मामला नहीं है। उन्होंने कहा- 

"एक समावेशी और मजबूत लोकतंत्र की पहली शर्त महिलाओं की सक्रिय भागीदारी है। निर्णय लेने वाली जगहों पर जब तक महिलाएं नहीं होंगी, तब तक नीतियां समग्र नहीं बन सकतीं।"

उन्होंने जमीनी स्तर के नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को गढ़ने में युवा महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी।

राहुल गांधी के नेतृत्व और ओसियां के भरोसे का जिक्र

राजनीति में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बात करते हुए दिव्या ने लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने लगातार महिलाओं को मुख्यधारा की राजनीति में लाने और उन्हें नेतृत्व सौंपने का काम किया है, जिससे देश की अनगिनत युवा लड़कियों को प्रेरणा मिली है।

अपनी राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी ताकत ओसियां (राजस्थान) की जनता का अटूट भरोसा है। उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि एक जनप्रतिनिधि तभी सफल है जब वह सीधा आम जनता की समस्याओं से जुड़ा हो और शासन के प्रति जवाबदेह हो।

वैश्विक मंच पर राजस्थान का गौरव

इस विशेष सत्र का संचालन आत्मा सुधीर कुमार ने किया, जिसमें यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स, रिसर्चर्स और विभिन्न देशों के छात्र शामिल हुए। चर्चा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

  • नेतृत्व की चुनौतियां: राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली सामाजिक और व्यवस्थागत बाधाएं।

  • लैंगिक समानता: सार्वजनिक संस्थानों में महिलाओं को प्रोत्साहित करने वाले सिस्टम की जरूरत।

  • युवा नेतृत्व: नई पीढ़ी की महिलाओं को नीति-निर्माण से जोड़ना।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

सत्र के अंत में हुए सवाल-जवाब दौर में दुनिया भर के छात्रों ने भारतीय शासन व्यवस्था और लैंगिक समानता पर सवाल पूछे, जिनका दिव्या ने बेबाकी से जवाब दिया। ऑक्सफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित मंच पर दिव्या मदेरणा का यह संबोधन न केवल राजस्थान के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उभरती महिला नेतृत्व की एक सशक्त तस्वीर भी पेश करता है।